Lifestyle Portal
  •   ४ असार २०७८, शुक्रबार

दलान पर बैसल लाल काका : मैथिली कथा

२४ माघ २०७५, बिहीबार २०:१५

दलान पर बैसल लाल काका सँ जिज्ञासावश पुछलहुँ,यौ काका किछु अपन मिथिलाक सन्दर्भ मे प्राचीन बात कहियौक १ काका बजलाह हे हौ हम तँ ओतेक पढ़ल लिखल नहि छि जे तोरा मिथिला पारम्परिक संस्कृतिक संबंध मे किछु बिशेष बात कहब,मुदा पुछलह तँ सुनह हम ओहि समय केँ मिथिला ग्राम्य जीवनक बिषय मे किछु कहैत छिय ! बात बेसी पुरान नहि तीन चारि दशक पूर्वक छी ! ओहि समय मे कोनो परिवार मे भरि दिनक मेहनतक उपरान्तो यदि आधो पेट भोजन भेटि जाइत छल तँ ओकर प्रसन्नता देखवा योग्य छल ! कमला कोशिक बिभिषिकाक दंश झेलैत परिस्थिति जन्य समस्या सँ पीडीत कतेक परिवार मे साँझक साँझ उपास रह पड़ैत छल एक मध्यम बर्गीय परिवार मे बाहर सँ आयल जनेर,खुद्दी आ मरूआ,मकई,खेसारीक रोटी,भुजा वा उबालि केँ भात बना पेट भरि गेला पर संतुष्ट रहैत छलाह | उच्च जमींनदार परिवार मे चावल (भात),दालि आ व्यंजन भेटैत छल ! निम्न मजदूर परिवार मे तँ मालिक ओहिठाम सँ भरि दिनक श्रमक बदला मे भेटल सेर दू सेर मरूआ,मकई,खेसारी सँ सपरिवार मिल बाँटि प्रसन्नता पूर्वक खाइत छलाह ! बिषम परिस्थिति मे कोशी कमलाक देल गेल उपहार भेंट,सारूख,चिचोर,घेंचुल,डोका,कांकोर आ बारी झारी मे होबयबला सजमनि,कदिमा ,कुमहर,सीम ,विविध साग करमी,पटुआ गेनहारी, बथुआ, ओल,अरिकोचक संग अलुहा,सुथनी सँ प्रण रक्षा करैत छल ! विकल्प नहि रहला पर पकुआ (आमक आँठी) केँ कुटि पीसी सुखा पेटक क्षुधा शांत करैत छल ! एतेक समस्या रहलाक उपरान्तो ओहि समय मे जे आपसी स्नेह,समाजिकता,एकता,भाईचारा आ मानवीय भावना छल ओ आब कहाँ रु असह्य दुस्ख झेलैत अपन सभ्यता संस्कृतिकेँ बरकरार रखने जहि आनन्द सँ रहैत छल ओ एखन कथमपि संभव नहि ! ओहि समय मे घरक महत्व कुलदेवी,देवता,पावैन तिहार,विवाह ,द्विरागमन, मान,सम्मान टोल पड़ोस आ गाम घरक पारस्परिक सहयोग छल ,देवतुल्य मानल जायबला अतिथि केँ जे सत्कार भेटैत छल अहि सब सन्दर्भ मे दोसर दिन कहब ! सुनि मन विस्मित भेल कहलहुँ काका अहाँक अहि बात केँ हमू मैथिली मचानू मे राखव !

प्रस्तुत वाक्याशंहरु मिथिलाको मैथिल भाषबाट लिइएको एउटा नयाँ पुस्ताका पुरुष र पुराना पुस्ताका लाल काका बिचको कुराकानी हो । मिथिलामा भएका केहि दशकअघिका कुराहरु, सामन्तवाद, गरिबी र उत्पिडन यस कथामा समाहित भएको छ । काकाले केहि दशकअघिको मिथिलाको परिवेश, कमला र कोशिका खोलाका कुराहरु, कृषी अनि केहि मौलिक साग र तिउनका कुराहरु गरेका छन् । यस कथा पूर्ण छैन् किनकि अब दोश्रो भागमा काकाको कथाले सार पाउनेछ । काकालाई यो कथा र शब्दका लागि अन्तमा श्रोताले मिथिला नगरले काकालाई मचान अर्थात माथिल्लो आसनमा राखेर सम्मान गर्नेछ भनी भनेंका छन् । काकाले मिथिलामा भोकमरी लाग्दा र अन्न कम हुँदा पुराना आँपका दानाहरुलाई पिसेर खाएको र भोक शान्त पारेको पनि वर्णन गरेका छन् । यस्तो अवस्थामा पनि मिथिलाको भातृत्व र सहृदयपना कम नभएको काकाको गवाही छ ।

लाईभमाण्डु

प्रतिक्रिया दिनुहोस !
Loading comments...
सम्बन्धित खबरहरु

‘वासु शशी’ नेपाली भाषासाहित्यका अमर प्राज्ञको नाउँ हो । उनको जन्म १९९३ साल चैत १३ गते काठमाडौँको पशुपतिमा भएको थियो

चैत एक गते देखि भर्चुअल रूपमा सुरुवात भएको बाल नाटक महोत्सव चैत बाह्र गते कर्मी नाट्री समुह चितवनको प्रस्तुति ”

एशियाली देशहरुमा १०८ घण्ट या १०८ धाराहरु र १०८ भजन तथा मन्त्रहरुको ठूलो महत्व छ । नेपालमा शुभ तथा वैदिक

काठमाण्डौ । नेपाली युवाहरुले बिगत ७ वर्ष देखि अंग्रेजी महिनाको जनवरी १ तारिखको अवसर पारेर नेपाली मौलिक उत्पादन र सबै